
मेरठ में सोनू उर्फ रोनू कश्यप की निर्मम हत्या और जला हुआ शव मिलने के मामले ने मंगलवार को राजनीतिक तूल पकड़ लिया।
पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद और आज़ाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आज़ाद को मुजफ्फरनगर पुलिस ने रास्ते में ही रोक दिया, जिसके बाद माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया।
बच्चन सिंह चौक पर रोका गया काफिला
चंद्रशेखर आज़ाद सिविल लाइन थाना क्षेत्र के बच्चन सिंह चौक से आगे बढ़ रहे थे, तभी भारी पुलिस बल ने उनके काफिले को रोक लिया। जैसे ही रोकने की खबर फैली, समर्थक मौके पर जुटने लगे पुलिस और नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
वरिष्ठ अधिकारी लगातार सांसद से वापस लौटने की अपील करते नजर आए।
“गोली मार दो, लेकिन आवाज नहीं रुकेगी”
मीडिया से बातचीत में चंद्रशेखर आज़ाद ने बेहद आक्रामक लहजे में कहा— “मुझे रोकने का एक ही तरीका है—या तो गोली मार दो, वरना जब तक जिंदा हूं, अपने लोगों की आवाज बनता रहूंगा।”
उन्होंने कहा कि वह एक दुखी मां और बहन के आंसू पोंछने जा रहे थे, लेकिन सरकार उन्हें यह मानवीय अधिकार भी नहीं दे रही।
यहां संवेदना भी अब अनुमति लेकर बांटी जा रही है।
सरकार पर भेदभाव का आरोप
सांसद ने आरोप लगाया कि दलित- पिछड़े- अल्पसंख्यक समाज के पीड़ितों के मामलों में सरकार का रवैया भेदभावपूर्ण है।
उन्होंने सवाल उठाया— “जब भाजपा के नेताओं को पीड़ितों से मिलने से नहीं रोका गया, तो मुझे क्यों?”
मुआवजा, नौकरी और CBI जांच की मांग
चंद्रशेखर आज़ाद ने सोनू कश्यप के परिवार के लिए 50 लाख रुपये मुआवजा, एक सरकारी नौकरी, पूरे मामले की CBI जांच की मांग दोहराई।
उन्होंने कहा कि अन्याय के खिलाफ उनकी लड़ाई जारी रहेगी, चाहे रास्ते में कितनी ही रुकावटें क्यों न आएं।
Politics + Law & Order = High Voltage Mix
सोनू कश्यप हत्याकांड अब सिर्फ एक क्राइम केस नहीं, बल्कि Law & Order, Social Justice, Political एकाउंटेबिलिटी का बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, आने वाले दिनों में यह मामला UP politics में और उबाल ला सकता है।
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